Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.174.5: फिर उन्होंने मुझे देवदत्त नामक शंख दिया, जिसकी ध्वनि बहुत तीव्र होती है। देवराज इन्द्र ने स्वयं इस दिव्य मुकुट को मेरे सिर पर रखा।   |   mahabharat अध्याय 3.174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.174.5 
देवदत्तं च मे शङ्खं पुन: प्रादान्महारवम्।
दिव्यं चेदं किरीटं मे स्वयमिन्द्रो युयोज ह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने मुझे देवदत्त नामक शंख दिया, जिसकी ध्वनि बहुत तीव्र होती है। देवराज इन्द्र ने स्वयं इस दिव्य मुकुट को मेरे सिर पर रखा।
 
Then he gave me this conch named Devadatta which makes a very loud sound. Devraj Indra himself placed this divine crown on my head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)