वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार अपने आगमन का वृत्तांत सुनाकर अर्जुन ने अपने सभी भाइयों के साथ वहीं रात्रि बिताई।
Vaishmpayana says: O King! Having thus narrated the story of his arrival, Arjuna along with all his brothers spent the night there.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि निवातकवचयुद्धपर्वणि अस्त्रदर्शनसंकेते चतु:सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत निवातकवचयुद्धपर्वमें अस्त्रदर्शनके लिये संकेतविषयक एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)