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mahabharat 3.174.16: अर्जुन ने कहा, 'महाराज, कल प्रातः आप उन सभी दिव्यास्त्रों को देखेंगे, जिनसे मैंने भयंकर निवातकवचों का वध किया है।'   |   mahabharat अध्याय 3.174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.174.16 
अर्जुन उवाच
श्व: प्रभाते भवान् द्रष्टा दिव्यान्यस्त्राणि सर्वश:।
निवातकवचा घोरा यैर्मया विनिपातिता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा, 'महाराज, कल प्रातः आप उन सभी दिव्यास्त्रों को देखेंगे, जिनसे मैंने भयंकर निवातकवचों का वध किया है।'
 
Arjuna said, 'Maharaj, tomorrow morning you will see all those divine weapons with which I have killed the terrible Nivatakavachas.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)