श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.174.13 
दिष्टॺा च लोकपालैस्त्वं समेतो भरतर्षभ।
दिष्टॺा वर्धामहे पार्थ दिष्टॺासि पुनरागत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! आप समस्त जगत के रक्षकों से मिले, यह भी हमारे सौभाग्य का लक्षण है। यह हमारा सौभाग्य है कि हम उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं। हे अर्जुन! यह हमारा सौभाग्य है कि आप पुनः हमारे पास लौट आए हैं॥13॥
 
O best of the Bharatas! You met all the protectors of the world, this is also a sign of good fortune for us. It is our good fortune that we are progressing on the path of progress. Arjuna! It is our good fortune that you have returned to us again.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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