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mahabharat 3.174.10: इसके बाद मैंने तुम्हें अपने भाइयों के साथ इस गंधमादन की शाखा वाले पर्वत के शिखर पर देखा ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.174.10 
ततो भवन्तमद्राक्षं भ्रातृभि: परिवारितम्।
गन्धमादनपादस्य पर्वतस्यास्य मूर्धनि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद मैंने तुम्हें अपने भाइयों के साथ इस गंधमादन की शाखा वाले पर्वत के शिखर पर देखा ॥10॥
 
After this, I saw you along with my brothers on the peak of this mountain which is a branch of Gandhamadana. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)