Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.d4h-61h: युद्ध में यह सब करने की शक्ति स्वयं देवराज इन्द्र में भी नहीं है। हे हिरण्यपुर के संहारक वीर धनंजय! आज देवराज इन्द्र अवश्य ही तुम पर अत्यंत प्रसन्न होंगे। वीर! तुमने अपने पराक्रम और तप के बल से आकाश में उड़ते हुए इस विशाल नगर को नष्ट कर दिया, जिसे समस्त देवता और दानव मिलकर भी नष्ट नहीं कर सके।॥60 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्ध में यह सब करने की शक्ति स्वयं देवराज इन्द्र में भी नहीं है। हे हिरण्यपुर के संहारक वीर धनंजय! आज देवराज इन्द्र अवश्य ही तुम पर अत्यंत प्रसन्न होंगे। वीर! तुमने अपने पराक्रम और तप के बल से आकाश में उड़ते हुए इस विशाल नगर को नष्ट कर दिया, जिसे समस्त देवता और दानव मिलकर भी नष्ट नहीं कर सके।॥60 1/2॥
‘Even Devraj Indra himself does not have the power to do all this in a war. O brave Dhananjay, the destroyer of Hiranyapur! Surely Devraj Indra will be very pleased with you today. Brave! With the power of your valour and penance, you destroyed this huge city flying in the sky, which even all the gods and demons together could not destroy.'॥ 60 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥