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mahabharat 3.173.d3h-45: शत्रुराज! उस दिव्य पुरुष के लिए वे बड़े-बड़े सर्प, चाबुक मारने वाले, चिथड़े (वस्त्र) के समान थे। भक्तों पर कृपा करने वाले वे महादेवजी सर्पों का जनेऊ धारण किए हुए थे। उन्हें देखकर मेरा सारा भय नष्ट हो गया। भरतश्रेष्ठ! तब मैंने उस भयंकर और सनातन पाशुपतास्त्र को गाण्डीव धनुष पर चढ़ाकर, अनन्त तेजस्वी त्रिनेत्रधारी भगवान शंकर को प्रणाम करके उन दैत्यों के विनाश के लिए उन पर चलाया। उस अस्त्र के छूटते ही उसमें से सहस्त्रों रूप प्रकट हो गए। 43-45॥   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक d3h-45
 
 
श्लोक  3.173.d3h-45 
लेलिहानैर्महानागै: कृतचीरममित्रहन्।
(भक्तानुकम्पिनं देवं नागयज्ञोपवीतिनम्।)
विभीस्ततस्तदस्त्रं तु घोरं रौद्रं सनातनम्॥ ४३॥
दृष्ट्वा गाण्डीवसंयोगमानीय भरतर्षभ।
नमस्कृत्वा त्रिनेत्राय शर्वायामिततेजसे॥ ४४॥
मुक्तवान् दानवेन्द्राणां पराभावाय भारत।
मुक्तमात्रे ततस्तस्मिन् रूपाण्यासन् सहस्रश:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुराज! उस दिव्य पुरुष के लिए वे बड़े-बड़े सर्प, चाबुक मारने वाले, चिथड़े (वस्त्र) के समान थे। भक्तों पर कृपा करने वाले वे महादेवजी सर्पों का जनेऊ धारण किए हुए थे। उन्हें देखकर मेरा सारा भय नष्ट हो गया। भरतश्रेष्ठ! तब मैंने उस भयंकर और सनातन पाशुपतास्त्र को गाण्डीव धनुष पर चढ़ाकर, अनन्त तेजस्वी त्रिनेत्रधारी भगवान शंकर को प्रणाम करके उन दैत्यों के विनाश के लिए उन पर चलाया। उस अस्त्र के छूटते ही उसमें से सहस्त्रों रूप प्रकट हो गए। 43-45॥
 
Enemy King! The big snakes with lashing tongues were like rags (clothes) for that divine man. That Mahadevji, who was kind to the devotees, was wearing the sacred thread of snakes. All my fear vanished after seeing him. Bharatshrestha! Then, I attached that terrible and eternal Pashupatastra to the Gandiva bow and saluted the infinitely bright three-eyed Lord Shankar and fired it at him for the destruction of those demons. As soon as that weapon was released, thousands of forms appeared from it. 43-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)