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mahabharat 3.173.75: 'यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, पक्षी और सर्प भी आपके सामने टिक नहीं सकते। कुन्तीकुमार! कुन्तीपुत्र धर्मात्मा युधिष्ठिर आपके पराक्रम से जीती हुई पृथ्वी का पालन करेंगे। 75॥   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.173.75 
सयक्षासुरगन्धर्वै: सपक्षिगणपन्नगै:।
वसुधां चापि कौन्तेय त्वद्‍बाहुबलनिर्जिताम्।
पालयिष्यति धर्मात्मा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
'यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, पक्षी और सर्प भी आपके सामने टिक नहीं सकते। कुन्तीकुमार! कुन्तीपुत्र धर्मात्मा युधिष्ठिर आपके पराक्रम से जीती हुई पृथ्वी का पालन करेंगे। 75॥
 
'Even Yakshas, ​​demons, Gandharvas, birds and snakes cannot stand in front of you. Kuntikumar! The virtuous Yudhishthir, son of Kunti, will follow the earth won by your might. 75॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि निवातकवचयुद्धपर्वणि हिरण्यपुरदैत्यवधे त्रिसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत निवातकवचयुद्धपर्वमें हिरण्यपुरवासी दैत्योंके वधसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७७ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)