Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.73-74: 'आज तुमने मेरे सबसे बड़े शत्रुओं का वध करके गुरु दक्षिणा चुकाई है। धनंजय! इसी प्रकार तुम युद्धभूमि में भी सदैव अविचलित रहो और आसक्तिरहित होकर शस्त्रों का प्रयोग करो। देवता, दैत्य और राक्षस, कोई भी युद्ध में तुम्हारा सामना नहीं कर सकता।' 73-74 | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'आज तुमने मेरे सबसे बड़े शत्रुओं का वध करके गुरु दक्षिणा चुकाई है। धनंजय! इसी प्रकार तुम युद्धभूमि में भी सदैव अविचलित रहो और आसक्तिरहित होकर शस्त्रों का प्रयोग करो। देवता, दैत्य और राक्षस, कोई भी युद्ध में तुम्हारा सामना नहीं कर सकता।' 73-74
'Today you have paid the Guru Dakshina by killing my greatest enemies. Dhananjaya! Similarly you should always remain unperturbed in the battlefield and use weapons without any attachment. Gods, demons and monsters, no one can face you in battle. 73-74.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥