Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.7-8: मातलि ने कहा- पार्थ! दैत्यकुल की कन्या पुलोमा और महान असुरवंश की कन्या कालका, इन दोनों ने एक हजार दिव्य वर्षों तक घोर तपस्या की। तत्पश्चात् उनकी तपस्या पूर्ण होने पर ब्रह्माजी ने उन दोनों को आशीर्वाद दिया और यह वर माँगा कि 'हमारे पुत्रों का दुःख दूर हो जाए।' 7-8॥ | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मातलिरुवाच
पुलोमा नाम दैतेयी कालका च महासुरी।
दिव्यं वर्षसहस्रं ते चेरतु: परमं तप:॥ ७॥
तपसोऽन्ते ततस्ताभ्यां स्वयम्भूरदद् वरम्।
अगृह्णीतां वरं ते तु सुतानामल्पदु:खताम्॥ ८॥
अनुवाद
मातलि ने कहा- पार्थ! दैत्यकुल की कन्या पुलोमा और महान असुरवंश की कन्या कालका, इन दोनों ने एक हजार दिव्य वर्षों तक घोर तपस्या की। तत्पश्चात् उनकी तपस्या पूर्ण होने पर ब्रह्माजी ने उन दोनों को आशीर्वाद दिया और यह वर माँगा कि 'हमारे पुत्रों का दुःख दूर हो जाए।' 7-8॥
Matali said- Parth! Puloma, the daughter of the Daitya clan, and Kalka, the daughter of the great Asura dynasty, both of them performed severe penance for a thousand celestial years. Thereafter, after completion of their penance, Lord Brahma blessed both of them. He asked for this boon that 'the sorrow of our sons should go away'. 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥