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mahabharat 3.173.66-67h: मेरा हृदय हर्ष और उत्साह से भर गया। मैंने देवताओं का कार्य पूर्ण कर दिया था। अतः मातलि मुझे शीघ्रतापूर्वक उस युद्धभूमि से देवराज इन्द्र के महल में ले आए।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  3.173.66-67h 
मां तु संहृष्टमनसं क्षिप्रं मातलिरानयत्॥ ६६॥
देवराजस्य भवनं कृतकर्माणमाहवात्।
 
 
अनुवाद
मेरा हृदय हर्ष और उत्साह से भर गया। मैंने देवताओं का कार्य पूर्ण कर दिया था। अतः मातलि मुझे शीघ्रतापूर्वक उस युद्धभूमि से देवराज इन्द्र के महल में ले आए।
 
My heart was filled with joy and enthusiasm. I had completed the task of the gods. Therefore Matali quickly brought me from that battlefield to the palace of Devraja Indra. 66 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)