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mahabharat 3.173.63-64h: वे सब अपने पुत्रों, पिताओं और भाइयों के लिए विलाप करती हुई भूमि पर गिर पड़ीं। वे अनाथ स्त्रियाँ, जिनके पति मारे गए थे, छाती पीट-पीटकर करुण स्वर में रो और चीख रही थीं। उनके हार और आभूषण इधर-उधर बिखर गए थे।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  3.173.63-64h 
पेतु: पुत्रान् पितॄन् भ्रातॄन् शोचमाना महीतले।
रुदत्यो दीनकण्ठॺस्तु निनदन्त्यो हतेश्वरा:॥ ६३॥
उरांसि परिनिघ्नन्त्यो विस्रस्तस्रग्विभूषणा:।
 
 
अनुवाद
वे सब अपने पुत्रों, पिताओं और भाइयों के लिए विलाप करती हुई भूमि पर गिर पड़ीं। वे अनाथ स्त्रियाँ, जिनके पति मारे गए थे, छाती पीट-पीटकर करुण स्वर में रो और चीख रही थीं। उनके हार और आभूषण इधर-उधर बिखर गए थे।
 
All of them fell on the ground mourning for their sons, fathers and brothers. Those orphaned women whose husbands had been killed were beating their chests crying and screaming with pitiable voices. Their necklaces and ornaments were scattered here and there. 63 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)