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mahabharat 3.173.58: जब मैंने देखा कि मैंने एक ऐसा कार्य सम्पन्न कर लिया है जो देवताओं के लिए भी कठिन और असहनीय है, तब इन्द्रसारथि मातलि ने मेरा बहुत आदर-सत्कार किया ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.173.58 
तदसह्यं कृतं कर्म देवैरपि दुरासदम्।
दृष्ट्वा मां पूजयामास मातलि: शक्रसारथि:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने देखा कि मैंने एक ऐसा कार्य सम्पन्न कर लिया है जो देवताओं के लिए भी कठिन और असहनीय है, तब इन्द्रसारथि मातलि ने मेरा बहुत आदर-सत्कार किया ॥58॥
 
When I saw that I had accomplished a task which was difficult and unbearable even for the gods, Indrasarathi Matali honoured me a lot. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)