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mahabharat 3.173.57: दिव्य आभूषणों से विभूषित दैत्यों को पाशुपतास्त्र द्वारा कुचला गया देखकर देवताओं के सारथि मातलि अत्यन्त प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.173.57 
तथा रौद्रास्त्रनिष्पिष्टान् दिव्याभरणभूषितान्।
निशम्य परमं हर्षमगमद् देवसारथि:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
दिव्य आभूषणों से विभूषित दैत्यों को पाशुपतास्त्र द्वारा कुचला गया देखकर देवताओं के सारथि मातलि अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
Seeing that the demons adorned with celestial ornaments have been crushed by the Pashupatastra, the charioteer of the gods, Matali, was very pleased. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)