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mahabharat 3.173.46-51: महाराज! मृग, सिंह, व्याघ्र, भालू, भैंसा, सर्प, गाय, सिंह, हाथी, वानर, बैल, सूअर, बिलाव, भेड़िया, भूत, भैंसा, गिद्ध, गरुड़, चर्मरूपी गाय, देवता, ऋषि, गंधर्व, पिशाच, यक्ष, दैत्यराज, गुफावासी, निशाचर, मत्स्य, चिकारे, उल्लू, मत्स्य और अश्वरूपी नाना प्रकार के प्राणी प्रकट हुए। उन सबके हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और तलवारें थीं। इसी प्रकार बहुत से यातुधान भी गदा और तलवार धारण किए हुए प्रकट हुए। 46-51॥   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 46-51
 
 
श्लोक  3.173.46-51 
मृगाणामथ सिंहानां व्याघ्राणां च विशाम्पते।
ऋक्षाणां महिषाणां च पन्नगानां तथा गवाम्॥ ४६॥
शरभाणां गजानां च वानराणां च सङ्घश:।
ऋषभाणां वराहाणां मार्जाराणां तथैव च॥ ४७॥
शालावृकाणां प्रेतानां भुरुण्डानां च सर्वश:।
गृध्राणां गरुडानां च चमराणां तथैव च॥ ४८॥
देवानां च ऋषीणां च गन्धर्वाणां च सर्वश:।
पिशाचानां सयक्षाणां तथैव च सुरद्विषाम्॥ ४९॥
गुह्यकानां च संग्रामे नैर्ऋतानां तथैव च।
झषाणां गजवक्त्राणामुलूकानां तथैव च॥ ५०॥
मीनवाजिसरूपाणां नानाशस्त्रासिपाणिनाम्।
तथैव यातुधानानां गदामुद्‍गरधारिणाम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मृग, सिंह, व्याघ्र, भालू, भैंसा, सर्प, गाय, सिंह, हाथी, वानर, बैल, सूअर, बिलाव, भेड़िया, भूत, भैंसा, गिद्ध, गरुड़, चर्मरूपी गाय, देवता, ऋषि, गंधर्व, पिशाच, यक्ष, दैत्यराज, गुफावासी, निशाचर, मत्स्य, चिकारे, उल्लू, मत्स्य और अश्वरूपी नाना प्रकार के प्राणी प्रकट हुए। उन सबके हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और तलवारें थीं। इसी प्रकार बहुत से यातुधान भी गदा और तलवार धारण किए हुए प्रकट हुए। 46-51॥
 
Maharaj! Various types of creatures in the form of deer, lion, tiger, bear, buffalo, snake, cow, lion, elephant, monkey, bull, boar, tomcat, wolf, ghost, buffalo, vulture, Garuda, leathery cow, deity, sage, Gandharva, vampire, yaksha, seditious demon, caveman, nocturnal, fish, gazelle, owl, fish and horse-like emerged. All of them had different types of weapons and swords in their hands. Similarly, many Yatudhaan also appeared wearing mace and sword. 46-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)