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mahabharat 3.173.40-d1h: फिर, मैंने मन को एकाग्र करके, सिर झुकाकर, परमपिता परमेश्वर भगवान रुद्र को प्रणाम किया और कहा, 'सभी प्राणियों का कल्याण हो', मैंने उनके महान पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 40-d1h
 
 
श्लोक  3.173.40-d1h 
ततोऽहं देवदेवाय रुद्राय प्रयतो रणे॥ ४०॥
(प्रयत: प्रणतो भूत्वा नमस्कृत्य महात्मने।)
स्वस्ति भूतेभ्य इत्युक्त्वा महास्त्रं समचोदयम्।
 
 
अनुवाद
फिर, मैंने मन को एकाग्र करके, सिर झुकाकर, परमपिता परमेश्वर भगवान रुद्र को प्रणाम किया और कहा, 'सभी प्राणियों का कल्याण हो', मैंने उनके महान पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया।
 
Then, with my mind focused, I bowed my head and paid my obeisance to the Supreme God, Lord Rudra, saying, 'May all beings be blessed', I used his great Pashupatastra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)