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mahabharat 3.173.4: फल-फूलों से लदे हुए बहुमूल्य वृक्षों ने नगर को चारों ओर से घेर रखा था और नगर दिव्य एवं अत्यंत सुंदर पक्षियों से भरा हुआ था॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.173.4 
द्रुमै: पुष्पफलोपेतै: सर्वरत्नमयैर्वृतम्।
तथा पतत्त्रिभिर्दिव्यैरुपेतं सुमनोहरै:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
फल-फूलों से लदे हुए बहुमूल्य वृक्षों ने नगर को चारों ओर से घेर रखा था और नगर दिव्य एवं अत्यंत सुंदर पक्षियों से भरा हुआ था॥4॥
 
All the precious trees laden with fruits and flowers surrounded the city from all sides and the city was filled with divine and very beautiful birds. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)