Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.37-38h: उनके सिरों पर विचित्र मुकुट और पगड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके कवच और ध्वज भी विचित्र थे। अद्भुत आभूषणों से सुसज्जित, वे मेरे मनोरंजन का साधन बन गए। 37 1/2। | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचित्रमुकुटापीडा विचित्रकवचध्वजा:॥ ३७॥
विचित्राभरणाश्चैव नन्दयन्तीव मे मन:।
अनुवाद
उनके सिरों पर विचित्र मुकुट और पगड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके कवच और ध्वज भी विचित्र थे। अद्भुत आभूषणों से सुसज्जित, वे मेरे मनोरंजन का साधन बन गए। 37 1/2।
Strange crowns and turbans were seen on their heads. Their armour and flags were also strange. Adorned with wonderful ornaments, they became an object of entertainment for me. 37 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥