Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.33: हे भरतपुत्र! उस समय उन राक्षसों के साठ हजार रथी क्रोध और युद्ध की इच्छा से भरे हुए मुझसे युद्ध करने के लिए तैयार खड़े थे। यह देखकर मैंने गीध पंख युक्त तीखे बाणों से उन सबको घायल करना आरम्भ कर दिया। | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतपुत्र! उस समय उन राक्षसों के साठ हजार रथी क्रोध और युद्ध की इच्छा से भरे हुए मुझसे युद्ध करने के लिए तैयार खड़े थे। यह देखकर मैंने गीध पंख युक्त तीखे बाणों से उन सबको घायल करना आरम्भ कर दिया।
O son of Bharata! At that time, sixty thousand chariots of those demons, filled with resentment and desire for war, stood ready to fight with me. Seeing this, I began to injure them all with sharp arrows decorated with vulture feathers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥