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श्लोक  3.173.31 
ते वध्यमाना मद्‍बाणैर्वज्रवेगैरयस्मयै:।
पर्यभ्रमन्त वै राजन्नसुरा: कालचोदिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मेरे लोहे के बाणों का वेग वज्र के समान था। उनके आघात से वे काल प्रेरित राक्षस सब दिशाओं में भागने लगते थे।
 
Maharaj! The speed of my arrows made of iron was like that of thunderbolts. After being hit by them, those demons inspired by Kaal would start moving in all directions. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)