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mahabharat 3.173.28: हे परंतप! वह विशाल नगरी, जो इच्छानुसार इधर-उधर घूमती थी, अमरावती के समान थी; परंतु मैंने उसे नाना प्रकार के अस्त्रों से सब ओर से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.173.28 
अमरावतिसंकाशं तत् पुरं कामगं महत्।
अहमस्त्रैर्बहुविधै: प्रत्यगृह्णं परंतप॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे परंतप! वह विशाल नगरी, जो इच्छानुसार इधर-उधर घूमती थी, अमरावती के समान थी; परंतु मैंने उसे नाना प्रकार के अस्त्रों से सब ओर से रोक दिया।
 
O Parantapa! That huge city, which moved about at will, was equal to Amaravati; but I blocked it from all sides with various kinds of weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)