Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.173.27: वह दिव्य नगरी कभी पृथ्वी या पाताल में चली जाती, कभी ऊपर उड़ जाती, कभी तिरछी दिशाओं में चली जाती और कभी शीघ्रता से जल में डूब जाती॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह दिव्य नगरी कभी पृथ्वी या पाताल में चली जाती, कभी ऊपर उड़ जाती, कभी तिरछी दिशाओं में चली जाती और कभी शीघ्रता से जल में डूब जाती॥ 27॥
That divine city would sometimes go to the earth or the netherworld, sometimes fly up, sometimes move in oblique directions and sometimes quickly sink in the water.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥