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mahabharat 3.173.23: इस प्रकार मैंने अपने प्रज्वलित बाणों से उन सौ-सौ राक्षसों के सिर काटने आरम्भ कर दिये, जो मूढ़ भाव से एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.173.23 
तेषामेवं विमूढानामन्योन्यमभिधावताम्।
शिरांसि विशिखैर्दीप्तैर्न्यहनं शतसङ्घश:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने अपने प्रज्वलित बाणों से उन सौ-सौ राक्षसों के सिर काटने आरम्भ कर दिये, जो मूढ़ भाव से एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।
 
In this manner, with my blazing arrows, I began cutting off the heads of each hundred of those demons, who were attacking one another in a foolish state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)