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त्रिदशेशद्विषो यावत् क्षयमस्त्रैर्नयाम्यहम्।
न कथञ्चिद्धि मे पापा न वध्या ये सुरद्विष:॥ १७॥
अनुवाद
'ताकि मैं अपने अस्त्रों से देवराज के शत्रुओं का नाश कर सकूँ। देवताओं से द्वेष रखने वाले उन पापियों को मैं किसी भी प्रकार मारे बिना नहीं छोड़ सकता।'॥17॥
'So that I can destroy the enemies of Devraj with my weapons. I cannot leave those sinners who hate the gods without killing them in any way.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥