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mahabharat 3.173.16: अर्जुन बोले - हे राजन! हिरण्यपुर को देवताओं और दानवों के लिए अजेय जानकर मैंने प्रसन्नतापूर्वक मातलि से कहा - 'आप अपना रथ शीघ्रातिशीघ्र इस नगर में ले चलें।'   |   mahabharat अध्याय 3.173: अर्जुनद्वारा हिरण्यपुरवासी पौलोम तथा कालकेयोंका वध और इन्द्रद्वारा अर्जुनका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.173.16 
अर्जुन उवाच
सुरासुरैरवध्यं तदहं ज्ञात्वा विशाम्पते।
अब्रुवं मातलिं हृष्टो याह्येतत् पुरमञ्जसा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे राजन! हिरण्यपुर को देवताओं और दानवों के लिए अजेय जानकर मैंने प्रसन्नतापूर्वक मातलि से कहा - 'आप अपना रथ शीघ्रातिशीघ्र इस नगर में ले चलें।'
 
Arjun said - O King! Knowing that Hiranyapur is invincible for the Gods and Demons, I said to Matali happily - 'You should take your chariot to this city as soon as possible.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)