श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.172.8 
अन्तर्भूमिगताश्चान्ये हयानां चरणान्यथ।
व्यगृह्णन् दानवा घोरा रथचक्रे च भारत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! पृथ्वी पर प्रविष्ट हुए कुछ भयंकर राक्षसों ने मेरे घोड़ों के पैर और रथ के पहिये पकड़ लिए हैं।
 
O son of Bharata! Some fierce demons, who had entered the earth, caught hold of the legs of my horses and the wheels of my chariot. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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