श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.172.33 
कालस्य परिणामेन ततस्त्वमिह भारत।
एषामन्तकर: प्राप्तस्तत् त्वया च कृतं तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! कालान्तर में तुम उनका नाश करने के लिए यहाँ आये हो और भगवान् की इच्छा के अनुसार तुमने उनका संहार भी कर दिया है॥33॥
 
O Bharata! By the turn of time you have arrived here to destroy them and you have annihilated them as per the will of the God. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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