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mahabharat 3.172.32: (अर्जुन! तुम इंद्र के दूसरे रूप हो।) इंद्र ने तुम्हें इन राक्षसों को मारने के लिए दिव्य अस्त्र दिए हैं। आज तुमने जिन राक्षसों का वध किया है, उन्हें देवता भी नहीं मार सकते थे।   |   mahabharat अध्याय 3.172: निवातकवचोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.172.32 
तत एषां वधार्थाय शक्रोऽस्त्राणि ददौ तव।
न हि शक्या: सुरैर्हन्तुं य एते निहतास्त्वया॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
(अर्जुन! तुम इंद्र के दूसरे रूप हो।) इंद्र ने तुम्हें इन राक्षसों को मारने के लिए दिव्य अस्त्र दिए हैं। आज तुमने जिन राक्षसों का वध किया है, उन्हें देवता भी नहीं मार सकते थे।
 
(Arjuna! You are the second form of Indra.) Indra has given you divine weapons to kill these demons. The demons who have been killed by you today, could not have been killed by the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)