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श्लोक 3.172.28  |
मातलिरुवाच
आसीदिदं पुरा पार्थ देवराजस्य न: पुरम्।
ततो निवातकवचैरित: प्रच्याविता: सुरा:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| मातलि बोले- पार्थ! पूर्वकाल में यह नगर हमारे देवराज के अधीन था। तब निवातकवचों ने आकर देवताओं को यहाँ से भगा दिया था॥ 28॥ |
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| Matali said— Partha! In the past this city was under the control of our Devraj. Then the Nivatakavachas came and drove the Gods away from here.॥ 28॥ |
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