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mahabharat 3.172.28: मातलि बोले- पार्थ! पूर्वकाल में यह नगर हमारे देवराज के अधीन था। तब निवातकवचों ने आकर देवताओं को यहाँ से भगा दिया था॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.172: निवातकवचोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.172.28 
मातलिरुवाच
आसीदिदं पुरा पार्थ देवराजस्य न: पुरम्।
ततो निवातकवचैरित: प्रच्याविता: सुरा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मातलि बोले- पार्थ! पूर्वकाल में यह नगर हमारे देवराज के अधीन था। तब निवातकवचों ने आकर देवताओं को यहाँ से भगा दिया था॥ 28॥
 
Matali said— Partha! In the past this city was under the control of our Devraj. Then the Nivatakavachas came and drove the Gods away from here.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)