श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.172.26 
तदद्‍भुताकारमहं दृष्ट्वा नगरमुत्तमम्।
विशिष्टं देवनगरादपृच्छं मातलिं तत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह उत्तम एवं अद्भुत नगरी देवपुरी से भी उत्तम प्रतीत हुई, तब उसे देखकर मैंने मातलि से पूछा-॥26॥
 
That excellent and wonderful city appeared to be even better than Devpuri. Then after seeing it I asked Matali -॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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