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श्लोक 3.172.12  |
लक्षयित्वा च मां भीतमिदं वचनमब्रवीत्।
अर्जुनार्जुन मा भैस्त्वं वज्रमस्त्रमुदीरय॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| मुझे इस प्रकार भयभीत देखकर मातलि ने कहा- 'अर्जुन! अर्जुन! डरो मत। अब वज्रास्त्र का प्रयोग करो।'॥12॥ |
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| Seeing me frightened in this way Matali said- 'Arjuna! Arjuna! Do not be afraid. Use the Vajraastra now.'॥ 12॥ |
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