श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 172: निवातकवचोंका संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.172.1 
अर्जुन उवाच
अदृश्यमानास्ते दैत्या योधयन्ति स्म मायया।
अदृश्येनास्त्रवीर्येण तानप्यहमयोधयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे राजन! इस प्रकार अदृश्य रहकर वे राक्षस माया के द्वारा युद्ध करने लगे और मैं भी अपने अस्त्रों की अदृश्य शक्ति से उनसे युद्ध करने लगा॥1॥
 
Arjun said - O King! In this way, remaining invisible, those demons started fighting with the help of Maya and I too started fighting them with the invisible power of my weapons.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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