श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 171: दानवोंके मायामय युद्धका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.171.8 
तत्रोपदिष्टमिन्द्रेण दिव्यमस्त्रं विशोषणम्।
दीप्तं प्राहिणवं घोरमशुष्यत् तेन तज्जलम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने देवराज इन्द्र से प्राप्त दिव्य विषोषणास्त्र का प्रयोग किया, जो अत्यंत शक्तिशाली और भयानक था। उसके प्रभाव से वर्षा का सारा जल सूख गया॥8॥
 
Then I used the divine Visoshanashtra (weapon) which I had got from Devraja Indra, which was extremely powerful and terrifying. Because of it all the rain water dried up. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)