श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 171: दानवोंके मायामय युद्धका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.171.5 
नभस: प्रच्युता धारास्तिग्मवीर्या: सहस्रश:।
आवृण्वन् सर्वतो व्योम दिशश्चोपदिशस्तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आकाश से हजारों शक्तिशाली और भयंकर जलधाराएँ बरसने लगीं, जिनसे न केवल आकाश, अपितु सब ओर से दिशाएँ और उपदिशाएँ ढक गईं ॥5॥
 
Thousands of powerful and fierce streams of water began pouring down from the sky, which not only covered the sky, but all directions and sub-directions from all sides. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)