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mahabharat 3.170.4-5: राक्षसों द्वारा छोड़े गए भालों की भारी वर्षा मेरे रथ पर पड़ने लगी। साथ ही गदाओं और भालों के प्रहार भी होने लगे। उस रणभूमि में कुछ अन्य निवातकवच तीखे हथियार हाथ में लेकर मेरी ओर दौड़े। वे आक्रमण करने में कुशल थे। उनका रूप अत्यंत भयानक था और वे मृत्यु के स्वरूप के समान प्रतीत हो रहे थे। 4-5।   |   mahabharat अध्याय 3.170: अर्जुन और निवातकवचोंका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 170: अर्जुन और निवातकवचोंका युद्ध  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.170.4-5 
तच्छूलवर्षं सुमहद् गदाशक्तिसमाकुलम्।
अनिशं सृज्यमानं तैरपतन्मद्रथोपरि॥ ४॥
अन्ये मामभ्यधावन्त निवातकवचा युधि।
शितशस्त्रायुधा रौद्रा: कालरूपा: प्रहारिण:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों द्वारा छोड़े गए भालों की भारी वर्षा मेरे रथ पर पड़ने लगी। साथ ही गदाओं और भालों के प्रहार भी होने लगे। उस रणभूमि में कुछ अन्य निवातकवच तीखे हथियार हाथ में लेकर मेरी ओर दौड़े। वे आक्रमण करने में कुशल थे। उनका रूप अत्यंत भयानक था और वे मृत्यु के स्वरूप के समान प्रतीत हो रहे थे। 4-5।
 
The heavy shower of spears launched by the demons started falling on my chariot. Along with that, there were attacks of maces and spears also. Some other Nivatakavachas ran towards me in that battlefield with sharp weapons in their hands. They were skilled in attacking. Their appearance was very terrifying and they looked like the form of death. 4-5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)