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mahabharat 3.170.22: तत्पश्चात् मैंने राक्षसों के समस्त अस्त्र-शस्त्र नष्ट कर दिये और क्रोध में आकर उनमें से प्रत्येक को दस-दस बाणों से घायल करके उनसे बदला लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.170: अर्जुन और निवातकवचोंका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 170: अर्जुन और निवातकवचोंका युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.170.22 
छित्त्वा प्रहरणान्येषां ततस्तानपि सर्वश:।
प्रत्यविध्यमहं रोषाद् दशभिर्दशभि: शरै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मैंने राक्षसों के समस्त अस्त्र-शस्त्र नष्ट कर दिये और क्रोध में आकर उनमें से प्रत्येक को दस-दस बाणों से घायल करके उनसे बदला लिया।
 
Thereafter, I destroyed all the weapons of the demons and in anger I took revenge by wounding each of them with ten arrows each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)