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mahabharat 3.17.7: शाल्व की सेना के ठीक सामने प्रद्युम्न का श्रेष्ठ रथ उसकी श्रेष्ठ ध्वजा से लहरा रहा था। उस ध्वजा के स्वर्ण दण्ड पर मुँह खोले हुए मगरमच्छ का चिह्न अंकित था, जो तिमि नामक समस्त जलचरों को मथ रहा था। इससे शत्रु सैनिक अत्यंत भयभीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.17: प्रद्युम्न और शाल्वका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 17: प्रद्युम्न और शाल्वका घोर युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.17.7 
जलेचर: काञ्चनयष्टिसंस्थो
व्यात्तानन: सर्वतिमिप्रमाथी।
वित्रासयन् राजति वाहमुख्ये
शाल्वस्य सेनाप्रमुखे ध्वजाग्रॺ:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शाल्व की सेना के ठीक सामने प्रद्युम्न का श्रेष्ठ रथ उसकी श्रेष्ठ ध्वजा से लहरा रहा था। उस ध्वजा के स्वर्ण दण्ड पर मुँह खोले हुए मगरमच्छ का चिह्न अंकित था, जो तिमि नामक समस्त जलचरों को मथ रहा था। इससे शत्रु सैनिक अत्यंत भयभीत हो रहे थे।
 
Right in front of Shalva's army, Pradyumna's best chariot was fluttering with his best flag. On the golden staff of that flag was the symbol of a crocodile with its mouth open, which was churning up all the aquatic animals called Timi. It was greatly frightening the enemy soldiers. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)