श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 17: प्रद्युम्न और शाल्वका घोर युद्ध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.17.25 
स तैरभिहतो बाणैर्बहुभिस्तेन मोहित:।
निश्चेष्ट: कौरवश्रेष्ठ प्रद्युम्नोऽभूद् रणाजिरे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे कौरवश्रेष्ठ! इस प्रकार अनेक बाणों से घायल होकर प्रद्युम्न युद्धस्थल में मूर्छित होकर निश्चल हो गया।
 
O best of the Kauravas! Being thus struck by many arrows, Pradyumna became unconscious and motionless in that battle-field.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि सौभवधोपाख्याने सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें सौभवधोपाख्यानविषयक सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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