श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 17: प्रद्युम्न और शाल्वका घोर युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.17.14 
ततो बाणमयं वर्षं व्यसृजत् तरसा रणे।
प्रद्युम्नो भुजवेगेन शाल्वं सम्मोहयन्निव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब प्रद्युम्न भी शाल्व पर शीघ्रता से बाणों की वर्षा करने लगे, मानो युद्धभूमि में अपनी भुजाओं की तीव्रता से उसे मोहित कर रहे हों।
 
Then Pradyumna, too, began showering arrows upon Shalva quickly, as if enchanting him with the swiftness of his arms on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)