श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 17: प्रद्युम्न और शाल्वका घोर युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.17.12 
तस्य मायामयो वीर रथो हेमपरिष्कृत:।
सपताक: सध्वजश्च सानुकर्ष: स तूणवान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वीर! शाल्व के पास सोने से सजा एक जादुई रथ था। वह रथ ध्वजाओं, पताकाओं, भालों और तरकशों से सुसज्जित था। 12.
 
Brave! Shalva had a magical chariot decorated with gold. That chariot was equipped with flags, banners, spears and quivers. 12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)