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दृश्यन्ते स्म यथा रात्रौ तारास्तन्वभ्रसंवृता:।
तथा सहस्रशस्तत्र रत्नसङ्घा: प्लवन्त्युत॥ ५॥
अनुवाद
जिस प्रकार रात्रि में बादलों की पतली परत के बीच से हजारों तारे चमकते हुए दिखाई देते हैं, उसी प्रकार समुद्र के जल में हजारों रत्न तैरते हुए प्रतीत होते थे।
Just as thousands of stars appear to be shining through the thin cover of clouds at night, similarly thousands of gems seemed to be floating in the water of the ocean.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥