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mahabharat 3.168.9: चारों ओर दिव्य वाद्यों की भयानक ध्वनि तथा इन्द्र-सम्बन्धी स्तोत्रों की सुन्दर ध्वनि सुनाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.168.9 
वादित्राणि च दिव्यानि सुघोराणि समन्तत:।
स्तुतयश्चेन्द्रसंयुक्ता अश्रूयन्त मनोहरा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर दिव्य वाद्यों की भयानक ध्वनि तथा इन्द्र-सम्बन्धी स्तोत्रों की सुन्दर ध्वनि सुनाई देने लगी।
 
All around, the terrifying sound of divine musical instruments and the beautiful sounds of Indra-related hymns began to be heard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)