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mahabharat 3.168.83: 'कुन्तीनन्दन! जैसे प्राचीन काल में सब पर विजय पाने वाले इन्द्र ने दैत्यों पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार तुम भी इस रथ को युद्ध में बड़े पराक्रम से उपयोग करके निवातकवचों को परास्त करोगे॥83॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.168.83 
त्वमप्यनेन कौन्तेय निवातकवचान् रणे।
विजेता युधि विक्रम्य पुरेव मघवा वशी॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! जैसे प्राचीन काल में सब पर विजय पाने वाले इन्द्र ने दैत्यों पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार तुम भी इस रथ को युद्ध में बड़े पराक्रम से उपयोग करके निवातकवचों को परास्त करोगे॥83॥
 
'Kuntinandan! Just as in ancient times, Indra, the conqueror of all, had won over the demons, in the same way you will also defeat the Nivatakavachas by using this chariot with great valor in the battle. 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)