Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.168.79-80: तब मैंने उनसे सब बातें बताईं और कहा - 'मैं युद्ध में यही करने जा रहा हूँ। आप जान लें कि मैं निवातकवच नामक दैत्यों का वध करने की इच्छा से यहाँ आया हूँ। अतः हे पापरहित एवं सौभाग्यशाली देवताओं! आप मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं धन्य हो जाऊँ।' हे राजन! तब वे देवता प्रसन्न होकर उत्तम एवं मधुर वचनों से देवराज इन्द्र के समान मेरी स्तुति करके बोले -॥ 79-80॥ | mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब मैंने उनसे सब बातें बताईं और कहा - 'मैं युद्ध में यही करने जा रहा हूँ। आप जान लें कि मैं निवातकवच नामक दैत्यों का वध करने की इच्छा से यहाँ आया हूँ। अतः हे पापरहित एवं सौभाग्यशाली देवताओं! आप मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं धन्य हो जाऊँ।' हे राजन! तब वे देवता प्रसन्न होकर उत्तम एवं मधुर वचनों से देवराज इन्द्र के समान मेरी स्तुति करके बोले -॥ 79-80॥
Then I told them everything and said, 'This is what I am going to do in the war. You should know that I have come here with the desire to kill the demons named Nivatakavacha. Therefore, O sinless and fortunate gods! Please bless me in such a way that I am blessed.' O King! Then those gods became happy and praised me like the king of gods Indra with excellent and sweet words and said -॥ 79-80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥