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mahabharat 3.168.76-78: तत्पश्चात् उन्होंने इस अखंड प्रत्यंचा को मेरे गाण्डीव धनुष पर चढ़ा दिया। इस प्रकार युद्ध-सामग्री से सुसज्जित होकर मैं उस तेजस्वी रथ पर सवार होकर युद्ध के लिए चल पड़ा, जिस पर पूर्वकाल में देवराज ने विरोचन के पुत्र बलि को हराया था। महाराज! तब उस रथ की घरघराहट से सावधान होकर समस्त देवता मुझे देवराज समझकर मेरे पास आए और मुझे देखकर पूछा - 'अर्जुन! तुम क्या करने की तैयारी कर रहे हो?'॥ 76-78॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 76-78
 
 
श्लोक  3.168.76-78 
अजरां ज्यामिमां चापि गाण्डीवे समयोजयत्।
तत: प्रायामहं तेन स्यन्दनेन विराजता॥ ७६॥
येनाजयद् देवपतिर्बलिं वैरोचनिं पुरा।
ततो देवा: सर्व एव तेन घोषेण बोधिता:॥ ७७॥
मन्वाना देवराजं मां समाजग्मुर्विशाम्पते।
दृष्ट्वा च मामपृच्छन्त किं करिष्यसि फाल्गुन॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने इस अखंड प्रत्यंचा को मेरे गाण्डीव धनुष पर चढ़ा दिया। इस प्रकार युद्ध-सामग्री से सुसज्जित होकर मैं उस तेजस्वी रथ पर सवार होकर युद्ध के लिए चल पड़ा, जिस पर पूर्वकाल में देवराज ने विरोचन के पुत्र बलि को हराया था। महाराज! तब उस रथ की घरघराहट से सावधान होकर समस्त देवता मुझे देवराज समझकर मेरे पास आए और मुझे देखकर पूछा - 'अर्जुन! तुम क्या करने की तैयारी कर रहे हो?'॥ 76-78॥
 
Thereafter he attached this unbreakable string to my Gandiva bow. Thus, equipped with the war materials, I set out for the battle in that illustrious chariot, riding on which the king of gods had defeated Bali, the son of Virochan, in the past. Maharaj! Then, alerted by the rattling sound of that chariot, all the gods came to me thinking me to be the king of gods and seeing me asked- 'Arjun! What are you preparing to do?'॥ 76-78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)