Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.168.75: फिर उन्होंने मेरे शरीर के प्रत्येक अंग को मेरे रूप के अनुरूप आभूषणों से सुसज्जित किया और फिर मुझे यह अभेद्य तथा उत्तम कवच पहनाया, जो स्पर्श करने और देखने में सुन्दर है। | mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर उन्होंने मेरे शरीर के प्रत्येक अंग को मेरे रूप के अनुरूप आभूषणों से सुसज्जित किया और फिर मुझे यह अभेद्य तथा उत्तम कवच पहनाया, जो स्पर्श करने और देखने में सुन्दर है।
Then he adorned every part of my body with ornaments according to my form. After this he made me wear this impenetrable and excellent armour, which is beautiful to touch and looks.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥