Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.168.72-74: 'वे समुद्र के भीतर एक निर्जन स्थान में शरण लेते हैं। उनकी संख्या तीन करोड़ बताई जाती है और वे सभी समान रूप से सुंदर, बलवान और तेजस्वी हैं। हे कुन्तीपुत्र! इन सभी राक्षसों का वध करो। इससे ही तुम्हारी गुरुदक्षिणा पूरी होगी।' यह कहकर इन्द्र ने मुझे एक अत्यंत तेजस्वी दिव्य रथ दिया, जिसे मातलि ने लाया था। उसमें मोर के समान रोम वाले घोड़े जुते हुए थे। जब रथ आया, तो देवराज ने मेरे सिर पर यह उत्तम मुकुट बाँध दिया। | mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'वे समुद्र के भीतर एक निर्जन स्थान में शरण लेते हैं। उनकी संख्या तीन करोड़ बताई जाती है और वे सभी समान रूप से सुंदर, बलवान और तेजस्वी हैं। हे कुन्तीपुत्र! इन सभी राक्षसों का वध करो। इससे ही तुम्हारी गुरुदक्षिणा पूरी होगी।' यह कहकर इन्द्र ने मुझे एक अत्यंत तेजस्वी दिव्य रथ दिया, जिसे मातलि ने लाया था। उसमें मोर के समान रोम वाले घोड़े जुते हुए थे। जब रथ आया, तो देवराज ने मेरे सिर पर यह उत्तम मुकुट बाँध दिया।
'They take shelter in a remote place inside the ocean. Their number is said to be three crores and all of them are equally beautiful, strong and radiant. O son of Kunti, kill all these demons. This alone will complete your Guru-dakshina.' Saying this, Indra gave me a very lustrous divine chariot, which Matali had brought. It was harnessed by horses having hair like peacocks. When the chariot arrived, the king of gods tied this excellent crown on my head.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥