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mahabharat 3.168.64: ‘आप अमोघ, अजेय और संग्राम में अद्वितीय हैं। समस्त देवता और दानव मिलकर भी आपको रणभूमि में परास्त नहीं कर सकते।’ ऐसा कहकर देवराज के शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो गई। तत्पश्चात् उन्होंने पुनः कहा- 64॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.168.64 
अप्रमेयोऽप्रधृष्यश्च युद्धेष्वप्रतिमस्तथा।
अजेयस्त्वं हि संग्रामे सर्वैरपि सुरासुरै:।
अथाब्रवीत् पुनर्देव: सम्प्रहृष्टतनूरुह:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
‘आप अमोघ, अजेय और संग्राम में अद्वितीय हैं। समस्त देवता और दानव मिलकर भी आपको रणभूमि में परास्त नहीं कर सकते।’ ऐसा कहकर देवराज के शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो गई। तत्पश्चात् उन्होंने पुनः कहा- 64॥
 
'You are immeasurable, invincible and peerless in battle. Even all the gods and demons cannot defeat you in the battlefield.' Saying this, Devraj's body got excited. After that he again said – 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)