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mahabharat 3.168.63: हे अर्जुन! अब तो देवता भी तुम्हें युद्ध में नहीं हरा सकते। फिर मृत्युलोक में रहने वाले बेचारे अनुशासनहीन मनुष्यों का क्या होगा?॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.168.63 
न त्वमद्य युधा जेतुुं शक्य: सुरगणैरपि।
किं पुनर्मानुषे लोके मानुषैरकृतात्मभि:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! अब तो देवता भी तुम्हें युद्ध में नहीं हरा सकते। फिर मृत्युलोक में रहने वाले बेचारे अनुशासनहीन मनुष्यों का क्या होगा?॥ 63॥
 
'Arjuna! Now even the gods cannot defeat you in battle. Then what about the poor undisciplined humans living in the mortal world?॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)