Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.168.54-55: तत्पश्चात् मैंने उस दिव्य अमरावतीपुरी में प्रवेश करके, जहाँ गन्धर्वदेव की पूजा होती थी, हाथ जोड़कर सहस्र नेत्रों वाले इन्द्रदेव को प्रणाम किया। दानवीरों में श्रेष्ठ इन्द्रदेव प्रसन्न हुए और उन्होंने मुझे अपने सिंहासन के आधे भाग पर स्थान दिया। 54-55॥ | mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् मैंने उस दिव्य अमरावतीपुरी में प्रवेश करके, जहाँ गन्धर्वदेव की पूजा होती थी, हाथ जोड़कर सहस्र नेत्रों वाले इन्द्रदेव को प्रणाम किया। दानवीरों में श्रेष्ठ इन्द्रदेव प्रसन्न हुए और उन्होंने मुझे अपने सिंहासन के आधे भाग पर स्थान दिया। 54-55॥
After that, entering the divine Amravatipuri where God-Gandharva was worshipped, I folded my hands and bowed to the thousand-eyed Lord Indra. Lord Indra, the best among givers, was pleased and gave me a place on half of his throne. 54-55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥